उत्साह क्षितिज भाग-2
प्रश्न
1. कवि बादल से फुहार,
रिमझिम या बरसने के
स्थान पर 'गरजने' के
लिए कहता है, क्यों?
प्रश्न
2.कविता का शीर्षक उत्साह
क्यों रखा गया है?
उत्तर- कवि ने कविता
का शीर्षक उत्साह इसलिए रखा है, क्योंकि
कवि बादलों के माध्यम से
क्रांति और बदलाव लाना
चाहता है। वह लोगों
को क्रान्ति लाने के लिए
उत्साहित करना चाहते हैं
इसलिए कविता का शीर्षक उत्साह
रखा गया है|
प्रश्न
3.कविता में बादल किन-किन अर्थों की
ओर संकेत करता है ?
उत्तर- कविता में बादल निम्नलिखित
अर्थों की ओर संकेत
करता है -
1.पानी
बरसा कर सबकी प्यास
बुझाता है और सुखी
बनाता है|
2.गर्जन
कर क्रांतिकारी चेतना जागृत करता है|
3.नवनिर्माण
कर नवजीवन प्रदान करता है|
4. शब्दों
का ऐसा प्रयोग जिससे
कविता के किसी खास
भाव या दृश्य में
ध्वन्यात्मक प्रभाव पैदा हो, नाद-सौंदर्य कहलाता है।
प्रश्न
4.उत्साह कविता में ऐसे कौन-से शब्द हैं
जिनमें नाद-सौंदर्य मौजूद
है, छाँटकर लिखें।
उत्तर-
कविता की इन पंक्तियों
में नाद-सौंदर्य मौजूद
है -
1. "घेर
घेर घोर गगन, धाराधर
ओ!
2. ललित
ललित, काले घुँघराले,
4. विकल-विकल, उन्मन थे उन्मन
अट नहीं रही
प्रश्न
1.छायावाद की एक खास
विशेषता है अन्तर्मन के
भावों का बाहर की
दुनिया से सामंजस्य बिठाना।
कविता की किन पंक्तियों
को पढ़कर यह धारणा
पुष्ट होती है?लिखिए।
उत्तर-
कविता के निम्नलिखित पंक्तियों
को पढ़कर यह धारणा
पुष्ट होती है कि
प्रस्तुत कविता में अन्तर्मन के
भावों का बाहर की
दुनिया से सामंजस्य बिठाया
गया है :
कहीं
सांस लेते हो,
घर-घर भर देते
हो,
उड़ने
को नव में तुम
पर-पर कर देते
हो,
आंख
हटाता हूं तो
हट नहीं रही है।
प्रश्न
2.कवि की आँख फागुन
की सुंदरता से क्यों नहीं
हट रही है?
उत्तर-
कवि की आँख फागुन
की सुंदरता से इसलिए नहीं
हट रही है क्योंकि-
1.इस
महीने में प्रकृति का
सौंदर्य अत्यंत मनमोहक होता है|
2.पेड़ों
पर हरी और लाल
पत्तियाँ लटक रहे हैं|
3.चारों
ओर फैली हरियाली और
खिले रंग-बिरंगे फूल
खेल रहे हैं।
4.प्रकृति
का यह रूप जीवन
में नयी ऊर्जा का
संचार करता है|
5.फागुन
की यह सुंदरता सर्वव्यापक
हो गई है।
प्रश्न
3.प्रस्तुत कविता में कवि ने
प्रकृति की व्यापकता का
वर्णन किन रूपों में
किया है ?
उत्तर-
"अट नहीं रही है"
कविता में कवि ने
प्रकृति की व्यापकता का
वर्णन निम्नलिखित रूपों में किया है
-
1.फागुन
की हवा के स्पर्श
से धरती का कण-कण सुंदरता जाता
है।
2.पेड़-पौधे नए पत्ते
पाकर खिलखिला रहे हैं|
3.फूलों
की खुशबू वातावरण को सुगन्धित कर
रही है|
4.डालियाँ
कहीं हरी तो कहीं
लाल पत्तियों से भर जाती
हैं|
5.बाग़-बगीचों में चारों ओर
हरियाली छा गयी है|
6.कवि
को प्रकृति के सौंदर्य से
आँख हटाना मुश्किल लग रहा है|
प्रश्न
4.फागुन में ऐसा क्या
होता है जो बाकी
ऋतुओं से भिन्न होता
है?
उत्तर-
फागुन में प्रकृति की
शोभा अपने चरम पर
होती है| पेड़-पौधें
नए पत्तों, फल और फूलों
से लद जाते हैं,
हवा सुगन्धित हो उठती है।
आकाश साफ-स्वच्छ होता
है। पक्षियों के समूह आकाश
में विहार करते दिखाई देते
हैं। बाग-बगीचों और
पक्षियों में उल्लास भर
जाता हैं। इस तरह
फागुन का सौंदर्य बाकी
ऋतुओं से भिन्न है।
प्रश्न
5.इन कविताओं के आधार पर
निराला के काव्य-शिल्प
की विशेषताएँ बताएँ।
उत्तर-
महाकवि सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ जी छायावाद के
प्रमुख कवि माने जाते
हैं। उनके काव्य की
विशेषताएँ इस प्रकार हैं-
1.दोनों
कविताओं में प्रकृति चित्रण
द्वारा मन के भावों
को प्रकट किया गया है|
2.मानवीकरण
अलंकार का प्रयोग हुआ
है|
3.पहली
कविता में कवि बादल
को गरज-गरज कर
बरसने को कह रहे
हैं।
4.दूसरी
कविता में कवि फागुन
से बात करते हैं|
5.कविताओं
में तत्सम शब्दों का प्रयोग उचित
मात्रा में किया गया
है|
6.गीत-शैली का प्रयोग
हुआ है| लयबद्धता साफ़
दिखती है|
7.अनुप्रास,
रूपक, यमक, उपमा आदि
अलंकारों का प्रयोग अच्छे
तरीके से किया गया
है|
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